कर्म कारक (Accusative Case)
କର୍ମ କାରକ ହେଉଛି ସେହି ସଂଜ୍ଞା ବା ସର୍ବନାମ, ଯାହା ଉପରେ କ୍ରିୟାର ଫଳ ବା ପ୍ରଭାବ ପଡ଼େ। ଏହା କ୍ରିୟାର ସିଧାସଳଖ ପ୍ରଭାବିତ ଅଂଶକୁ ଦର୍ଶାଏ।
परिभाषा (ସଂଜ୍ଞା):
जिस संज्ञा (noun) या सर्वनाम (pronoun) पर क्रिया-व्यापार (action of the verb) का फल (result) या प्रभाव (effect) पड़ता है, वह कर्म कारक (Accusative Case) होता है। सरल शब्दों में, क्रिया का प्रभाव जिस पर सीधा पड़ता है, वह कर्म कारक कहलाता है।
- उदाहरण (ଉଦାହରଣ): लड़का फल खाता है। (ଏଠାରେ 'ଫଳ' ଖାଇବା କ୍ରିୟାର ପ୍ରଭାବ ଅଟେ।)
- उदाहरण (ଉଦାହରଣ): माँ बेटे को बुलाती है। (ଏଠାରେ 'ବେଟେ' ଡାକିବା କ୍ରିୟାର ପ୍ରଭାବ ଅଟେ।)
कर्म कारक के विभक्ति-चिह्न (Postpositions of Accusative Case)
କର୍ମ କାରକକୁ ଚିହ୍ନିବା ପାଇଁ 'କୋ' ଏବଂ କେତେକ ସ୍ଥଳରେ 'ସେ' ପରସର୍ଗ ବ୍ୟବହାର କରାଯାଏ। କିନ୍ତୁ ନିର୍ଜୀବ ବସ୍ତୁ ପାଇଁ ପ୍ରାୟତଃ କୌଣସି ପରସର୍ଗ ଲାଗେ ନାହିଁ।
कर्म कारक का मुख्य विभक्ति-चिह्न (postposition) 'को' है। कुछ विशेष स्थितियों में 'से' का प्रयोग भी होता है।
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'को' का प्रयोग (କୋ'ର ବ୍ୟବହାର):
- यह मुख्यतः प्राणिवाचक कर्म (animate objects) के साथ प्रयोग होता है।
- उदाहरण: राम मोहन को मारता है। (ଏଠାରେ 'ମୋହନ' ଏକ ପ୍ରାଣୀ ଏବଂ 'ମାରିବା' କ୍ରିୟାର କର୍ମ।)
- उदाहरण: माँ बच्चे को दूध पिलाती है।
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'को' का अप्रयोग (କୋ'ର ଅବ୍ୟବହାର):
- निर्जीव (inanimate) या अप्राणिवाचक कर्म (inanimate objects) के साथ प्रायः 'को' का प्रयोग नहीं होता।
- उदाहरण: राम रोटी खाता है। (यहाँ 'रोटी' कर्म कारक में है, पर 'को' नहीं लगा है।)
- उदाहरण: लड़का फल खाता है। (यहाँ 'फल' कर्म कारक में है, पर 'को' नहीं लगा है।)
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'से' का प्रयोग (ସେ'ର ବ୍ୟବହାର):
- कुछ विशेष क्रियाओं के साथ, जैसे 'पूछना' (to ask), 'से' का प्रयोग कर्म कारक के रूप में हो सकता है।
- उदाहरण: छात्र शिक्षक से पूछता है। (ଏଠାରେ 'ଶିକ୍ଷକ' ପଚାରିବା କ୍ରିୟାର କର୍ମ।)
कर्म कारक के प्रकार (Types of Accusative Case)
କର୍ମ କାରକ ମୁଖ୍ୟତଃ ଦୁଇ ପ୍ରକାରର ହୋଇଥାଏ: ମୁଖ୍ୟ କର୍ମ (ନିର୍ଜୀବ) ଏବଂ ଗୌଣ କର୍ମ (ସଜୀବ)।
कर्म दो प्रकार के होते हैं:
- मुख्य कर्म (Main Object): यह अप्राणिवाचक कर्म (inanimate object) होता है।
- उदाहरण: वह किताब पढ़ता है। (किताब - मुख्य कर्म)
- गौण कर्म (Secondary Object): यह प्राणिवाचक कर्म (animate object) होता है।
- उदाहरण: शिक्षक छात्रों को पढ़ाते हैं। (छात्रों - गौण कर्म)
कर्म कारक और संप्रदान कारक के 'को' में अंतर (Difference between 'को' in Accusative and Dative Case)
କର୍ମ କାରକ ଏବଂ ସମ୍ପ୍ରଦାନ କାରକ ଉଭୟରେ 'କୋ' ପରସର୍ଗ ବ୍ୟବହାର ହୁଏ, କିନ୍ତୁ ସେମାନଙ୍କର ଅର୍ଥ ଭିନ୍ନ। କର୍ମ କାରକରେ 'କୋ' କ୍ରିୟାର ସିଧାସଳଖ ପ୍ରଭାବିତ ବସ୍ତୁକୁ ଦର୍ଶାଏ, ଯେତେବେଳେ କି ସମ୍ପ୍ରଦାନ କାରକରେ 'କୋ' କାହାକୁ କିଛି ଦିଆଯାଉଛି ବା କାହା ପାଇଁ କିଛି କରାଯାଉଛି ତାହା ଦର୍ଶାଏ।
यह एक महत्वपूर्ण बिंदु है क्योंकि 'को' विभक्ति-चिह्न कर्म कारक और संप्रदान कारक (Dative Case) दोनों में प्रयोग होता है। इनके बीच अंतर समझना आवश्यक है।
- कर्म कारक में 'को': यह क्रिया के सीधे प्रभाव को दर्शाता है, जिस पर क्रिया का फल पड़ता है। यह क्रिया का सीधा उद्देश्य होता है।
- उदाहरण: पुलिस ने चोर को पकड़ा। (यहाँ 'चोर' पकड़ने की क्रिया का सीधा कर्म है।)
- संप्रदान कारक में 'को': यह 'के लिए' (for) या 'देने' (giving) के अर्थ में आता है, यानी जिसे कुछ दिया जाता है या जिसके लिए कुछ किया जाता है।
- उदाहरण: पिताजी ने बेटे को खिलौना दिया। (यहाँ 'बेटे' को खिलौना दिया गया है, इसलिए यह संप्रदान कारक है।)
कार्य उदाहरण (Worked Example):
निम्नलिखित वाक्यों में कर्म कारक पहचानिए और उसके प्रयोग का कारण बताइए:
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लड़की कहानी पढ़ती है।
- कर्म कारक: 'कहानी'
- कारण: 'पढ़ना' क्रिया का फल 'कहानी' पर पड़ रहा है। 'कहानी' अप्राणिवाचक कर्म है, इसलिए 'को' का प्रयोग नहीं हुआ है।
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शिक्षक ने छात्र को समझाया।
- कर्म कारक: 'छात्र को'
- कारण: 'समझाना' क्रिया का फल 'छात्र' पर पड़ रहा है। 'छात्र' प्राणिवाचक कर्म है, इसलिए 'को' का प्रयोग हुआ है।