क्रिया की परिभाषा (Definition of Verb)
କ୍ରିୟା ଶବ୍ଦର ଅର୍ଥ ହେଉଛି କୌଣସି କାର୍ଯ୍ୟ କରିବା ବା ହେବାକୁ ବୁଝାଏ। ଏହା ବାକ୍ୟରେ କାର୍ଯ୍ୟର ସୂଚନା ଦିଏ।
जिस शब्द या पद से किसी कार्य के करने या होने का बोध (ବୋଧ) होता है, उसे क्रिया (କ୍ରିୟା) कहते हैं। क्रिया वाक्य में किसी घटना या स्थिति का वर्णन करती है।
उदाहरण (ଉଦାହରଣ):
- उड़ना (ଉଡ଼ିବା)
- दौड़ना (ଦୌଡ଼ିବା)
- पीना (ପିଇବା)
- पढ़ना (ପଢ଼ିବା)
- हँसना (ହସିବା)
वाक्य प्रयोग (ବାକ୍ୟ ପ୍ରୟୋଗ):
- चिड़िया (ଚଢ଼େଇ) उड़ रही है।
- मोहन (ମୋହନ) दौड़ता है।
- विनोद (ବିନୋଦ) दूध (କ୍ଷୀର) अवश्य पीता है।
इन वाक्यों में 'उड़', 'दौड़ता', 'पीता' पद किसी न किसी कार्य के करने के सूचक हैं, अतः ये क्रिया पद हैं।
धातु की परिभाषा (Definition of Root)
ଧାତୁ ହେଉଛି କ୍ରିୟାର ମୂଳ ରୂପ। ଏଥିରୁ ବିଭିନ୍ନ ପ୍ରକାରର କ୍ରିୟା ଶବ୍ଦ ତିଆରି ହୁଏ।
क्रिया के मूलरूप (ମୂଳରୂପ) को 'धातु' (ଧାତୁ) कहते हैं। यह क्रिया का वह सबसे छोटा (ଛୋଟ) अंश (ଅଂଶ) है, जिसमें कोई प्रत्यय (ପ୍ରତ୍ୟୟ) नहीं जुड़ा होता। धातु ही क्रिया का आधार (ଆଧାର) होती है।
उदाहरण (ଉଦାହରଣ):
- पढ़ (ପଢ଼)
- उठ (ଉଠ)
- खा (ଖା)
- पी (ପି)
- खेल (ଖେଳ)
- लिख (ଲେଖ)
क्रिया और धातु का संबंध (Relation between Verb and Root)
କ୍ରିୟା ଓ ଧାତୁ ପରସ୍ପର ସହିତ ଜଡ଼ିତ। ଧାତୁରେ 'ନା' ଯୋଡ଼ି କ୍ରିୟାର ସାଧାରଣ ରୂପ ତିଆରି ହୁଏ।
धातु क्रिया का मूलांश (ମୂଳାଂଶ) है। धातुओं के साथ 'ना' (ନା) प्रत्यय जोड़कर क्रिया के सामान्य रूप (ସାଧାରଣ ରୂପ) बनाते हैं। एक धातु के व्यवहार (ବ୍ୟବହାର) से अनेक क्रिया रूप बन जाते हैं, जो कर्ता (କର୍ତ୍ତା) के लिंग (ଲିଙ୍ଗ), वचन (ବଚନ), पुरुष (ପୁରୁଷ) और काल (କାଳ) के अनुसार बदलते हैं।
क्रिया निर्माण की प्रक्रिया (Process of Verb Formation):
उदाहरण (ଉଦାହରଣ):
- धातु: पढ़
- क्रिया का सामान्य रूप: पढ़ना
- अन्य क्रिया रूप: पढ़ता, पढ़ी, पढ़ा, पढ़ेगा, पढ़ूँगा, पढ़ती है, पढ़ते हैं, आदि।
इसी प्रकार, 'लिख' धातु से 'लिखना' क्रिया बनती है और इसके रूप 'लिखता', 'लिखी', 'लिखा', 'लिखेगा', 'लिखूँगा' आदि होते हैं।
कार्य उदाहरण (Worked Example): 'खेल' धातु से विभिन्न क्रिया रूप बनाना।
- सामान्य क्रिया रूप: खेल + ना = खेलना (ଖେଳିବା)
- वर्तमान काल (ସାମ୍ପ୍ରତିକ କାଳ):
- वह खेलता है। (ପୁଲିଙ୍ଗ, ଏକବଚନ)
- वह खेलती है। (ସ୍ତ୍ରୀଲିଙ୍ଗ, ଏକବଚନ)
- वे खेलते हैं। (ପୁଲିଙ୍ଗ, ବହୁବଚନ)
- भूतकाल (ଅତୀତ କାଳ):
- उसने खेला। (ପୁଲିଙ୍ଗ, ଏକବଚନ)
- उसने खेली। (ସ୍ତ୍ରୀଲିଙ୍ଗ, ଏକବଚନ)
- भविष्यत् काल (ଭବିଷ୍ୟତ କାଳ):
- वह खेलेगा। (ପୁଲିଙ୍ଗ, ଏକବଚନ)
- वह खेलेगी। (ସ୍ତ୍ରୀଲିଙ୍ଗ, ଏକବଚନ)
यह दर्शाता है कि धातु 'खेल' से कैसे लिंग, वचन और काल के अनुसार क्रिया के रूप बदलते हैं।