क्रिया (Verb)
क्रिया वह शब्द है जिससे किसी कार्य के करने या होने का बोध होता है; जैसे - पढ़ना, लिखना आदि। क्रिया के मूल रूप को धातु कहते हैं; जैसे- पढ़, लिख। इनके साथ 'ना' जोड़ने से क्रिया बनती है। (संदर्भ: [[2]], [[3]], [[6]])
कर्म के आधार पर क्रिया के भेद (Types of Verb based on Object)
କର୍ମର ଆଧାରରେ କ୍ରିୟାର ପ୍ରକାରଭେଦକୁ ବୁଝିବା। ଏଥିରେ କ୍ରିୟା ସହିତ କର୍ମ ଅଛି କି ନାହିଁ, ତାହା ଦେଖାଯାଏ।
कर्म के आधार पर क्रिया के तीन भेद हो सकते हैं: (संदर्भ: [[2]])
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सकर्मक क्रिया (Transitive Verb) ଯେଉଁ କ୍ରିୟାକୁ କର୍ମର ଆବଶ୍ୟକତା ପଡ଼େ ଏବଂ ଏହାର ପ୍ରଭାବ କର୍ମ ଉପରେ ପଡ଼େ, ତାହା ସକର୍ମକ କ୍ରିୟା। ଏହି କ୍ରିୟାଗୁଡ଼ିକରେ କର୍ମ ନଥିଲେ ମଧ୍ୟ କର୍ମର ସମ୍ଭାବନା ଥାଏ।
जिस क्रिया के प्रयोग में 'कर्म' (object) की आवश्यकता पड़ती है और उसका सीधा प्रभाव कर्म पर पड़ता है, उसे सकर्मक क्रिया कहते हैं। वाक्य में कर्म न आने पर भी कर्म की संभावना बनी रहती है, इसलिए ये क्रियाएँ सर्वदा सकर्मक हैं। (संदर्भ: [[1]], [[3]], [[5]], [[6]])
उदाहरण:
- 'राम फल खाता है।' यहाँ 'खाना' क्रिया सकर्मक है, क्योंकि 'फल' कर्म है। (संदर्भ: [[2]])
- 'सुरेश पुस्तक पढ़ता है।' यहाँ 'पढ़ना' क्रिया के प्रयोग में 'कर्म' (पुस्तक) की आवश्यकता अनिवार्य रूप से पड़ रही है। (संदर्भ: [[3]], [[5]])
- अन्य सकर्मक क्रियाएँ: लिखना, पीना, काटना, देखना, सुनना, गाना, बजाना आदि। (संदर्भ: [[2]], [[6]])
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अकर्मक क्रिया (Intransitive Verb) ଯେଉଁ କ୍ରିୟାକୁ କର୍ମର ଆବଶ୍ୟକତା ପଡ଼େ ନାହିଁ ଏବଂ ଏହାର ପ୍ରଭାବ ସିଧାସଳଖ କର୍ତ୍ତା ଉପରେ ପଡ଼େ, ତାହା ଅକର୍ମକ କ୍ରିୟା। ଏଥିରେ 'କଣ' କିମ୍ବା 'କାହାକୁ' ପ୍ରଶ୍ନର କୌଣସି ଉତ୍ତର ମିଳେ ନାହିଁ।
जिन क्रियाओं के साथ उनका कर्म नहीं होता, वे अकर्मक क्रियाएँ कहलाती हैं। अकर्मक क्रिया का प्रभाव सीधे कर्ता (subject) पर पड़ता है। प्रश्न करने पर - 'क्या' या 'किसको' - उत्तर में कुछ नहीं आता। (संदर्भ: [[1]], [[3]], [[5]], [[6]])
उदाहरण:
- 'घोड़ा दौड़ता है।' इस वाक्य में 'दौड़ना' क्रिया किसी कर्म की अपेक्षा नहीं रखती। (संदर्भ: [[1]])
- 'श्याम दौड़ता है।' इस उदाहरण में 'दौड़ना' क्रिया का फल सीधे श्याम पर पड़ रहा है। इस वाक्य में कोई कर्म नहीं है। (संदर्भ: [[3]], [[5]])
- अन्य अकर्मक क्रियाएँ: जाना, आना, कूदना, उड़ना, तैरना, हँसना, सोना, उठना, बैठना, चलना, रोना, जागना आदि। (संदर्भ: [[1]], [[3]], [[6]])
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द्विकर्मक क्रिया (Ditransitive Verb) ଯେଉଁ କ୍ରିୟାର ଦୁଇଟି କର୍ମ ଥାଏ, ତାହାକୁ ଦ୍ୱିକର୍ମକ କ୍ରିୟା କୁହାଯାଏ। ଏଥିରେ ଗୋଟିଏ ମୁଖ୍ୟ କର୍ମ ଏବଂ ଅନ୍ୟଟି ଗୌଣ କର୍ମ ଥାଇପାରେ।
जिस क्रिया के दो कर्म होते हैं, उसे द्विकर्मक क्रिया कहते हैं। (संदर्भ: [[1]])
उदाहरण:
- 'मोहन सोहन को पुस्तक देता है।' इस वाक्य में क्रिया 'देना' है। इसके दो कर्म हैं: 'सोहन' (गौण कर्म) और 'पुस्तक' (मुख्य कर्म)। (संदर्भ: [[1]])
- अन्य द्विकर्मक क्रियाएँ: कहना, पूछना, पढ़ाना आदि। (संदर्भ: [[1]])
कार्य उदाहरण (Worked Examples)
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वाक्य: 'शीला ने संतरा खाया।' (संदर्भ: [[3]])
- विश्लेषण: यहाँ क्रिया 'खाया' है। 'क्या खाया?' प्रश्न करने पर उत्तर 'संतरा' मिलता है। 'संतरा' कर्म है। अतः यह सकर्मक क्रिया है।
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वाक्य: 'बच्चे हँस रहे हैं।' (संदर्भ: [[3]])
- विश्लेषण: यहाँ क्रिया 'हँस रहे हैं' है। 'क्या हँस रहे हैं?' या 'किसको हँस रहे हैं?' प्रश्न करने पर कोई उत्तर नहीं मिलता। क्रिया का प्रभाव सीधे 'बच्चे' (कर्ता) पर पड़ रहा है। अतः यह अकर्मक क्रिया है।