क्रिया के भेद: समाप्ति के आधार पर (କ୍ରିୟାର ପ୍ରକାର: ସମାପ୍ତି ଉପରେ ଆଧାରିତ)
କାର୍ଯ୍ୟ ସମାପ୍ତ ହେଲା କି ନାହିଁ, ସେହି ଆଧାରରେ କ୍ରିୟାକୁ ଦୁଇ ଭାଗରେ ବିଭକ୍ତ କରାଯାଇଛି।
क्रिया (କ୍ରିୟା) वह शब्द है जिससे किसी कार्य के होने या करने का बोध होता है। हिंदी व्याकरण में, क्रियाओं को विभिन्न आधारों पर वर्गीकृत किया जाता है। समाप्ति (ସମାପ୍ତି) के आधार पर, क्रिया के दो मुख्य भेद होते हैं, जो यह दर्शाते हैं कि वाक्य में क्रिया का कार्य पूर्ण हुआ है या नहीं।
१. समापिका क्रिया (ସମାପିକା କ୍ରିୟା - ସମାପ୍ତ କ୍ରିୟା)
ଏହି କ୍ରିୟାଗୁଡ଼ିକ ବାକ୍ୟର ଶେଷରେ ଆସି କାର୍ଯ୍ୟର ସମାପ୍ତି ସୂଚାନ୍ତି।
जो क्रियाएँ वाक्य के अंत में आती हैं और कार्य (କାର୍ଯ୍ୟ) तथा समय की समाप्ति (ସମାପ୍ତି) का बोध कराती हैं, उन्हें समापिका क्रिया (Finite Verb) कहते हैं। ये क्रियाएँ वाक्य को पूर्ण करती हैं और कर्ता (subject) के लिंग, वचन और काल के अनुसार बदलती हैं।
उदाहरण (ଉଦାହରଣ):
- घोड़ा दौड़ता था। (ଘୋଡ଼ା ଦୌଡ଼ୁଥିଲା।)
- यहाँ 'दौड़ता था' क्रिया कार्य की समाप्ति को दर्शाती है।
- राम घर जाएगा। (ରାମ ଘରକୁ ଯିବ।)
- यहाँ 'जाएगा' क्रिया भविष्य में कार्य की समाप्ति का बोध कराती है।
अन्य उदाहरण:
- बच्चे खेल रहे हैं।
- मैंने खाना खाया।
- वे कल आएँगे।
२. असमापिका क्रिया (ଅସମାପିକା କ୍ରିୟା - ଅସମାପ୍ତ କ୍ରିୟା)
ଏହି କ୍ରିୟାଗୁଡ଼ିକ ବାକ୍ୟରେ କାର୍ଯ୍ୟର ସମାପ୍ତି କିମ୍ବା ପୂର୍ଣ୍ଣତା ସୂଚାନ୍ତି ନାହିଁ।
जो क्रियाएँ वाक्य में आती हैं, लेकिन उनकी समाप्ति (ସମାପ୍ତି) या पूर्णता (ପୂର୍ଣ୍ଣତା) नहीं हो पाती है, उन्हें असमापिका क्रिया (Non-finite Verb) कहते हैं। ये क्रियाएँ वाक्य को पूर्ण नहीं करतीं और अक्सर मुख्य क्रिया से पहले आती हैं। इन्हें 'कृदन्त' (କୃଦନ୍ତ) भी कहा जाता है।
उदाहरण (ଉଦାହରଣ):
- रमेश रोज खाकर दफ्तर जाता है। (ରମେଶ ପ୍ରତିଦିନ ଖାଇକରି ଅଫିସ ଯାଏ।)
- यहाँ 'खाकर' क्रिया कार्य की पूर्णता नहीं दर्शाती, बल्कि यह बताती है कि एक कार्य के बाद दूसरा कार्य हुआ।
- गाड़ी अब आनेवाली है। (ଗାଡ଼ି ଏବେ ଆସିବାକୁ ଅଛି।)
- यहाँ 'आनेवाली' क्रिया कार्य की समाप्ति नहीं, बल्कि उसकी निकटता या संभावना को दर्शाती है।
अन्य उदाहरण:
- वह पढ़कर सो गया। ('पढ़कर' असमापिका क्रिया)
- हँसते हुए बच्चे अच्छे लगते हैं। ('हँसते हुए' असमापिका क्रिया)
- मुझे खेलना पसंद है। ('खेलना' असमापिका क्रिया)
समापिका और असमापिका क्रियाओं में अंतर:
समापिका क्रियाएँ वाक्य का मुख्य भाग होती हैं और काल (tense) तथा कर्ता के अनुसार बदलती हैं, जबकि असमापिका क्रियाएँ सहायक होती हैं और वाक्य में संज्ञा, विशेषण या क्रियाविशेषण का कार्य कर सकती हैं, और ये काल या कर्ता से प्रभावित नहीं होतीं।