अव्यय (Indeclinable) - परिभाषा और प्रकार
ଓଡ଼ିଆ: ଏହି ଅଧ୍ୟାୟରେ ଆମେ ଅବ୍ୟୟ ଶବ୍ଦର ପରିଭାଷା ଏବଂ ଏହାର ବିଭିନ୍ନ ପ୍ରକାର ବିଷୟରେ ଜାଣିବା। ଅବ୍ୟୟ ହେଉଛି ଏପରି ଶବ୍ଦ ଯାହାର ରୂପ କୌଣସି ପରିସ୍ଥିତିରେ ପରିବର୍ତ୍ତନ ହୁଏ ନାହିଁ।
अव्यय की परिभाषा (Definition of Indeclinable)
ଓଡ଼ିଆ: ଅବ୍ୟୟ ଶବ୍ଦଗୁଡ଼ିକ ଲିଙ୍ଗ, ବଚନ, କାରକ କିମ୍ବା କାଳ ଅନୁସାରେ ପରିବର୍ତ୍ତିତ ହୁଅନ୍ତି ନାହିଁ। ଏଗୁଡ଼ିକୁ ଅବିକାରୀ ଶବ୍ଦ ମଧ୍ୟ କୁହାଯାଏ।
हिंदी व्याकरण में, कुछ शब्द ऐसे होते हैं जिनके रूप में लिंग (gender), वचन (number), कारक (case) या काल (tense) के कारण कोई परिवर्त्तन (change) नहीं होता। ये शब्द हमेशा अपने मूल रूप (original form) में ही प्रयुक्त होते हैं। ऐसे शब्दों को अव्यय (Indeclinable) या अविकारी शब्द (Unalterable words) कहते हैं।
उदाहरण (Examples):
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'धीरे-धीरे' (ଧୀରେ ଧୀରେ) शब्द को देखिए:
- लड़का धीरे-धीरे चलता है।
- लड़की धीरे-धीरे चलती है।
- लड़के धीरे-धीरे चलते हैं।
- इन सभी वाक्यों में 'धीरे-धीरे' का रूप नहीं बदला।
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'और' (ଏବଂ) शब्द को देखिए:
- राम और श्याम पढ़ते हैं।
- सीता और गीता पढ़ती हैं।
- यहाँ भी 'और' का रूप अपरिवर्तित है।
विकारी और अविकारी शब्द (Declension and Indeclinable Words)
ଓଡ଼ିଆ: ହିନ୍ଦୀରେ ଶବ୍ଦଗୁଡ଼ିକୁ ଦୁଇ ଭାଗରେ ବିଭକ୍ତ କରାଯାଇଛି: ବିକାରୀ ଏବଂ ଅବିକାରୀ। ବିକାରୀ ଶବ୍ଦଗୁଡ଼ିକ ପରିବର୍ତ୍ତିତ ହୁଅନ୍ତି, କିନ୍ତୁ ଅବିକାରୀ ଶବ୍ଦଗୁଡ଼ିକ ଅପରିବର୍ତ୍ତିତ ରୁହନ୍ତି।
हिंदी भाषा में शब्दों को मुख्य रूप से दो वर्गों में बांटा गया है:
- विकारी शब्द (Declension words): वे शब्द जिनमें लिंग, वचन, कारक या काल के कारण परिवर्तन होता है। ये चार प्रकार के होते हैं: संज्ञा (Noun), सर्वनाम (Pronoun), विशेषण (Adjective) और क्रिया (Verb)।
- अविकारी शब्द (Indeclinable words) या अव्यय: वे शब्द जिनमें लिंग, वचन, कारक या काल के कारण कोई परिवर्तन नहीं होता।
इस विभाजन को निम्न सारणी द्वारा समझा जा सकता है:
अव्यय के प्रकार (Types of Indeclinable)
ଓଡ଼ିଆ: ଅବ୍ୟୟ ମୁଖ୍ୟତଃ ଚାରି ପ୍ରକାରର ହୋଇଥାଏ: କ୍ରିୟାବିଶେଷଣ, ସମ୍ବନ୍ଧବୋଧକ, ସମୁଚ୍ଚୟବୋଧକ ଏବଂ ବିସ୍ମୟାଦିବୋଧକ।
अव्यय के मुख्य रूप से चार भेद होते हैं:
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क्रियाविशेषण अव्यय (Adverb Indeclinable): ଓଡ଼ିଆ: ଯେଉଁ ଅବ୍ୟୟ ଶବ୍ଦ କ୍ରିୟା ବା ଅନ୍ୟ କ୍ରିୟାବିଶେଷଣର ବିଶେଷତା ପ୍ରକାଶ କରେ, ତାହାକୁ କ୍ରିୟାବିଶେଷଣ ଅବ୍ୟୟ କୁହାଯାଏ। जो अव्यय शब्द क्रिया (verb) की विशेषता (characteristic) बताते हैं, उन्हें क्रियाविशेषण अव्यय कहते हैं। ये क्रिया के काल (time), स्थान (place), रीति (manner) और परिमाण (quantity) का बोध कराते हैं। उदाहरण:
- राम धीरे-धीरे चलता है। (रीतिवाचक - कैसे चलता है?)
- वह आज आएगा। (कालवाचक - कब आएगा?)
- तुम वहाँ बैठो। (स्थानवाचक - कहाँ बैठो?)
- वह बहुत खाता है। (परिमाणवाचक - कितना खाता है?)
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संबंधबोधक अव्यय (Postposition/Preposition Indeclinable): ଓଡ଼ିଆ: ଯେଉଁ ଅବ୍ୟୟ ଶବ୍ଦ ବାକ୍ୟରେ ଗୋଟିଏ ପଦ (ବିଶେଷତଃ ସଂଜ୍ଞା ବା ସର୍ବନାମ)ର ଅନ୍ୟ ପଦ ସହିତ ସମ୍ବନ୍ଧ ଦର୍ଶାଏ, ତାହାକୁ ସମ୍ବନ୍ଧବୋଧକ ଅବ୍ୟୟ କୁହାଯାଏ। जो अव्यय शब्द वाक्य में किसी संज्ञा (noun) या सर्वनाम (pronoun) का संबंध (relation) वाक्य के दूसरे शब्दों से बताते हैं, उन्हें संबंधबोधक अव्यय कहते हैं। ये अक्सर 'के', 'की', 'से' आदि के साथ प्रयुक्त होते हैं। उदाहरण:
- माँ के बिना बच्चा रो रहा है। (के बिना - ସେ ବିନା)
- गोपाल के साथ हरि आ रहा है। (के साथ - ସହିତ)
- सीता के बदले गीता जाएगी। (के बदले - ବଦଳରେ)
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समुच्चयबोधक अव्यय (Conjunction Indeclinable): ଓଡ଼ିଆ: ଯେଉଁ ଅବ୍ୟୟ ଶବ୍ଦ ଦୁଇଟି ଶବ୍ଦ, ବାକ୍ୟାଂଶ କିମ୍ବା ବାକ୍ୟକୁ ଯୋଡ଼େ କିମ୍ବା ଅଲଗା କରେ, ତାହାକୁ ସମୁଚ୍ଚୟବୋଧକ ଅବ୍ୟୟ କୁହାଯାଏ। जो अव्यय शब्द दो शब्दों (words), वाक्यांशों (phrases) या वाक्यों (sentences) को आपस में जोड़ते (join) हैं या अलग (separate) करते हैं, उन्हें समुच्चयबोधक अव्यय कहते हैं। उदाहरण:
- राम और श्याम मित्र हैं। (और - ଏବଂ)
- तुम पढ़ो या खेलो। (या - କିମ୍ବା)
- वह गरीब है लेकिन ईमानदार है। (लेकिन - କିନ୍ତୁ)
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विस्मयादिबोधक अव्यय (Interjection Indeclinable): ଓଡ଼ିଆ: ଯେଉଁ ଅବ୍ୟୟ ଶବ୍ଦ ବକ୍ତାଙ୍କର ବିସ୍ମୟ, ଆନନ୍ଦ, ଶୋକ, ଘୃଣା, ସମ୍ବୋଧନ ଆଦି ଭାବନାକୁ ପ୍ରକାଶ କରେ, ତାହାକୁ ବିସ୍ମୟାଦିବୋଧକ ଅବ୍ୟୟ କୁହାଯାଏ। जो अव्यय शब्द वक्ता (speaker) के मन के विस्मय (wonder), हर्ष (joy), विषाद (sorrow), शोक (grief), घृणा (hatred), संबोधन (address) आदि भावों (emotions) को व्यक्त करते हैं, उन्हें विस्मयादिबोधक अव्यय कहते हैं। इनके बाद अक्सर विस्मयादिबोधक चिह्न (!) लगता है। उदाहरण:
- वाह! कितना सुंदर दृश्य है। (वाह! - ବାଃ!)
- अरे! तुम कब आए? (अरे! - ଆରେ!)
- छिः-छिः! कितनी गंदगी है। (छिः-छिः! - ଛିଃ ଛିଃ!)
एक उदाहरण (A Worked Example)
ଓଡ଼ିଆ: ଏହି ଉଦାହରଣରେ, ଆମେ ଏକ ବାକ୍ୟରୁ ଅବ୍ୟୟ ଶବ୍ଦଗୁଡ଼ିକୁ ଚିହ୍ନଟ କରିବା।
वाक्य: "अरे! बूढ़ा हाथी धीरे-धीरे जंगल की ओर जा रहा था और वह अचानक गिर पड़ा।"
अव्यय शब्द पहचानें:
- अरे! - विस्मयादिबोधक अव्यय (आश्चर्य का भाव)
- धीरे-धीरे - क्रियाविशेषण अव्यय (क्रिया 'जा रहा था' की रीति बता रहा है)
- की ओर - संबंधबोधक अव्यय (संज्ञा 'जंगल' का संबंध बता रहा है)
- और - समुच्चयबोधक अव्यय (दो वाक्यों 'बूढ़ा हाथी धीरे-धीरे जंगल की ओर जा रहा था' और 'वह अचानक गिर पड़ा' को जोड़ रहा है)
- अचानक - क्रियाविशेषण अव्यय (क्रिया 'गिर पड़ा' की रीति बता रहा है)