अव्यय (Indeclinable)
ଓଡ଼ିଆ: ଯେଉଁ ଶବ୍ଦଗୁଡ଼ିକ ବାକ୍ୟରେ ବ୍ୟବହାର ହେବା ସମୟରେ ନିଜର ମୂଳ ରୂପରେ ରୁହନ୍ତି ଏବଂ ସେମାନଙ୍କର କୌଣସି ପରିବର୍ତ୍ତନ ହୁଏ ନାହିଁ, ସେମାନଙ୍କୁ ଅବ୍ୟୟ କୁହାଯାଏ। ଏଗୁଡ଼ିକ ଅବିକାରୀ ଶବ୍ଦ ଅଟନ୍ତି।
वाक्य में प्रयुक्त होते समय जो शब्द मूल रूप में ही आते हैं और उनका कोई रूप-परिवर्त्तन नहीं होता, उन्हें अव्यय (ଅବ୍ୟୟ) कहते हैं। इसलिए अव्यय को अविकारी शब्द (ଅବିକାରୀ ଶବ୍ଦ) भी कहते हैं। जैसे - और, के पहले, वहाँ, शाबाश, हाँ आदि। अव्यय के चार मुख्य प्रकार हैं: क्रियाविशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक और विस्मयादिबोधक।
समुच्चयबोधक अव्यय (Conjunction)
ଓଡ଼ିଆ: ସମୁଚ୍ଚୟବୋଧକ ଅବ୍ୟୟ ହେଉଛି ଏପରି ଶବ୍ଦ ଯାହା ଦୁଇଟି ଶବ୍ଦ କିମ୍ବା ବାକ୍ୟକୁ ଯୋଡ଼ିଥାଏ କିମ୍ବା ଅଲଗା କରିଥାଏ। ଏହା ବାକ୍ୟଗୁଡ଼ିକ ମଧ୍ୟରେ ସମ୍ବନ୍ଧ ସ୍ଥାପନ କରେ।
जो अव्यय (ଅବ୍ୟୟ) दो शब्दों (ଶବ୍ଦ) या दो वाक्यों (ବାକ୍ୟ) को परस्पर जोड़ते हैं अथवा अलग करते हैं, उन्हें समुच्चयबोधक अव्यय (ସମୁଚ୍ଚୟବୋଧକ ଅବ୍ୟୟ) कहते हैं। ये वाक्य के विभिन्न भागों के बीच संबंध स्थापित करते हैं।
उदाहरण:
- राम और श्याम खेल रहे हैं। (ଏଠାରେ 'और' ଦୁଇଟି ଶବ୍ଦକୁ ଯୋଡ଼ୁଛି।)
- मैं कटक या पुरी जाऊँगा। (ଏଠାରେ 'या' ଦୁଇଟି ସ୍ଥାନକୁ ଅଲଗା କରିବାର ବିକଳ୍ପ ଦେଉଛି।)
- परिश्रम करो, ताकि जीवन सफल बन सके। (ଏଠାରେ 'ताकि' ଦୁଇଟି ବାକ୍ୟକୁ ଯୋଡ଼ୁଛି।)
- मैंने कहा कि राम अच्छा लड़का है। (ଏଠାରେ 'कि' ଦୁଇଟି ବାକ୍ୟକୁ ଯୋଡ଼ୁଛି।)
समुच्चयबोधक अव्यय के प्रकार (Types of Conjunctions)
ଓଡ଼ିଆ: ସମୁଚ୍ଚୟବୋଧକ ଅବ୍ୟୟଗୁଡ଼ିକୁ ସେମାନଙ୍କର କାର୍ଯ୍ୟ ଅନୁଯାୟୀ ବିଭିନ୍ନ ପ୍ରକାରରେ ବିଭକ୍ତ କରାଯାଇଛି, ଯେପରିକି ଯୋଡ଼ିବା, ଅଲଗା କରିବା, ବିରୋଧ ଦେଖାଇବା ଇତ୍ୟାଦି।
समुच्चयबोधक अव्यय निम्न प्रकार के होते हैं:
-
संयोजक (Conjunctive): ये दो शब्दों, वाक्यांशों या वाक्यों को जोड़ने का काम करते हैं।
- उदाहरण: और, एवं, व, तथा।
- वाक्य: हरि और श्याम मेरे पास आये हैं।
-
वियोजक (Disjunctive): ये दो या दो से अधिक विकल्पों को प्रस्तुत करते हुए उन्हें अलग करते हैं।
- उदाहरण: या, अथवा, वा, किंवा, चाहे-चाहे, न कि, क्या-क्या, नहीं तो।
- वाक्य: तुम पढ़ो या खेलो।
-
विरोधदर्शक (Adversative): ये दो वाक्यों या वाक्यांशों के बीच विरोध या अंतर प्रकट करते हैं।
- उदाहरण: किन्तु, परन्तु, मगर, लेकिन, पर, बल्कि, वरन्।
- वाक्य: वह आया परन्तु रुक नहीं सका।
-
परिणामदर्शक (Resultative): ये एक वाक्य के कार्य का परिणाम दूसरे वाक्य में दर्शाते हैं।
- उदाहरण: इसलिए, अतएव, सो, अतः।
- वाक्य: उसने मेहनत की, इसलिए सफल हुआ।
-
उद्देश्यवाचक (Purpose): ये एक क्रिया के उद्देश्य को दूसरे वाक्य से जोड़ते हैं।
- उदाहरण: कि, ताकि, जिससे।
- वाक्य: मन लगाकर पढ़ो, ताकि अच्छे अंक ला सको।
-
संकेतसूचक (Conditional): ये एक शर्त या संकेत को दूसरे वाक्य से जोड़ते हैं।
- उदाहरण: यदि, अगर ... तो, यद्यपि ... तथापि।
- वाक्य: यदि तुम आओगे, तो मैं चलूँगा।
-
स्वरूपदर्शक (Explanatory/Illustrative): ये एक बात का स्पष्टीकरण या स्वरूप दूसरे वाक्य में बताते हैं।
- उदाहरण: कि, जैसे, मानो।
- वाक्य: ऐसा लगता है मानो बारिश होगी।
समुच्चयबोधक अव्यय का महत्व (Importance of Conjunctions)
ଓଡ଼ିଆ: ସମୁଚ୍ଚୟବୋଧକ ଅବ୍ୟୟ ବାକ୍ୟଗୁଡ଼ିକୁ ସଂକ୍ଷିପ୍ତ ଓ ସ୍ପଷ୍ଟ କରିବାରେ ସାହାଯ୍ୟ କରେ, ଯାହାଦ୍ୱାରା ଭାଷା ଅଧିକ ପ୍ରଭାବଶାଳୀ ହୁଏ।
समुच्चयबोधक अव्यय वाक्यों को संक्षिप्त (ସଂକ୍ଷିପ୍ତ) और स्पष्ट (ସ୍ପଷ୍ଟ) बनाने में मदद करते हैं। इनके प्रयोग से भाषा में प्रवाह (ପ୍ରବାହ) और सुंदरता (ସୁନ୍ଦରତା) आती है।
उदाहरण और अभ्यास (Examples and Practice)
उदाहरण 1: दिए गए वाक्यों में समुच्चयबोधक अव्यय पहचानिए और उसका प्रकार बताइए:
- क. राम और श्याम विद्यालय गए।
- ख. तुम चाय लोगे या कॉफी?
- ग. वह गरीब है, लेकिन ईमानदार है।
हल:
- क. और - संयोजक
- ख. या - वियोजक
- ग. लेकिन - विरोधदर्शक
उदाहरण 2: नीचे दिए गए अव्ययों की सहायता से एक-एक वाक्य बनाइए:
- परन्तु
- तथापि
- ताकि
हल:
- परन्तु: मैंने उसे बुलाया, परन्तु वह नहीं आया।
- तथापि: यद्यपि वह बीमार है, तथापि काम कर रहा है।
- ताकि: जल्दी चलो, ताकि ट्रेन न छूटे।