अनुवाद क्या है? (What is Translation?)
ଏହି ଭାଗରେ ଆମେ ବୁଝିବା ଯେ ଅନୁବାଦ କାହାକୁ କୁହାଯାଏ। ଗୋଟିଏ ଭାଷାରେ ଥିବା କଥାକୁ ଅନ୍ୟ ଭାଷାରେ ଲେଖିବା ହିଁ ଅନୁବାଦ।
अनुवाद (ଅନୁବାଦ) का अर्थ है एक भाषा में लिखे गए वाक्य या वाक्यों को दूसरी भाषा में लिखना। यह एक महत्वपूर्ण भाषाई कौशल (ଭାଷାଗତ କୌଶଳ) है जो हमें विभिन्न भाषाओं के बीच विचारों और सूचनाओं का आदान-प्रदान (ଆଦାନ ପ୍ରଦାନ) करने में मदद करता है। अनुवादक (ଅନୁବାଦକ) को दोनों भाषाओं का सही ज्ञान होना आवश्यक है, तभी वह मूल विचार (ମୂଳ ବିଚାର) को ठीक से दूसरी भाषा में प्रस्तुत कर सकता है। हमारी मातृभाषा ओड़िआ से राष्ट्रभाषा (ରାଷ୍ଟ୍ରଭାଷା) हिन्दी में और हिन्दी से ओड़िआ में अनुवाद करने के लिए इन दोनों भाषाओं को जानना अत्यंत आवश्यक है। [[1]]
अनुवाद का महत्व (Importance of Translation)
ଏହି ଭାଗରେ ଆମେ ଜାଣିବା ଯେ ଅନୁବାଦ କାହିଁକି ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ। ଏହା ଆମକୁ ଅନ୍ୟ ଭାଷାଭାଷୀ ଲୋକଙ୍କ ସହ ଯୋଗାଯୋଗ କରିବାରେ ସାହାଯ୍ୟ କରେ।
आधुनिक युग (ଆଧୁନିକ ଯୁଗ) जन-संपर्क (ଜନ-ସମ୍ପର୍କ) का युग है। ऐसे में अनेक भाषाएँ सीखना आवश्यक हो जाता है। हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा और राजभाषा (ରାଜଭାଷା) दोनों है। नई शिक्षा नीति (ନୂଆ ଶିକ୍ଷା ନୀତି) में भी हिन्दी पर अधिक जोर दिया जा रहा है, क्योंकि अपने प्रांत (ପ୍ରାନ୍ତ) से बाहर निकलते ही छात्र-छात्राओं को हिन्दी में बात करने की जरूरत पड़ती है। [[3]] अनुवाद हमें विभिन्न संस्कृतियों (ସଂସ୍କୃତି) और विचारों को समझने में सहायता करता है, जिससे ज्ञान का विस्तार (ଜ୍ଞାନର ବିସ୍ତାର) होता है। यह अंतरप्रान्तीय व्यवहार (ଅନ୍ତରପ୍ରାନ୍ତୀୟ ବ୍ୟବହାର) की भाषा के रूप में भी उपयोगी है। [[6]]
अनुवाद की प्रक्रिया (Process of Translation)
ଏଠାରେ ଆମେ ଶିଖିବା ଯେ କିପରି ଅନୁବାଦ କରାଯାଏ। ଏଥିପାଇଁ କିଛି ନିର୍ଦ୍ଦିଷ୍ଟ ପଦକ୍ଷେପ ଅନୁସରଣ କରିବାକୁ ପଡ଼େ।
अनुवाद करते समय कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना चाहिए:
- मूल विचार को समझना: सबसे पहले, मूल भाषा (ମୂଳ ଭାଷା) के वाक्य को ध्यान से पढ़ना और उसके मूल विचार को ठीक से समझ लेना चाहिए। [[1]]
- वाक्य के अंगों को समझना: फिर, मूल भाषा के वाक्य के विभिन्न अंगों (ଅଂଶ) को समझना जरूरी है। प्रत्येक भाषा की वाक्य-संरचना (ବାକ୍ୟ-ସଂରଚନା) की शैली अलग-अलग होती है। वाक्य के अंगों का आपस में कैसा संबंध है, उसे भी समझना आवश्यक है। [[1]]
- कर्ता और क्रिया का संबंध: वाक्य के दो मुख्य अंश होते हैं - उद्देश्य (ଉଦ୍ଦେଶ୍ୟ) अथवा कर्त्ता (କର୍ତ୍ତା) का अंश और उसके अनुसार चलने वाली क्रिया (କ୍ରିୟା) या विधेय (ବିଧେୟ) का अंश। हिन्दी भाषा की एक विशेषता यह है कि क्रिया कर्त्ता के लिंग (ଲିଙ୍ଗ), वचन (ବଚନ) और पुरुष (ପୁରୁଷ) के अनुरूप होती है। इसके विपरीत, ओड़िआ में क्रिया पर कर्त्ता के लिंग का प्रभाव नहीं पड़ता। इसलिए, हिन्दी में हर संज्ञापद (ସଂଜ୍ଞାପଦ) का लिंग जानना बहुत जरूरी है। [[1]]
हिन्दी और ओड़िआ में व्याकरणिक अंतर (Grammatical Differences in Hindi and Odia)
ଏହି ଭାଗରେ ଆମେ ହିନ୍ଦୀ ଏବଂ ଓଡ଼ିଆ ଭାଷା ମଧ୍ୟରେ ଥିବା କିଛି ବ୍ୟାକରଣଗତ ପାର୍ଥକ୍ୟ ବିଷୟରେ ଜାଣିବା, ଯାହା ଅନୁବାଦ ପାଇଁ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ।
1. लिंग-वचन के अनुसार क्रिया: हिन्दी में कर्त्ता के लिंग और वचन के अनुसार क्रिया बदलती है।
- उदाहरण:
- राम पढ़ेगा। (ରାମ ପଢ଼ିବ।) - यहाँ 'राम' पुल्लिंग (ପୁଲିଙ୍ଗ) है, इसलिए क्रिया 'पढ़ेगा' है।
- सीता पढ़ेगी। (ସୀତା ପଢ଼ିବ।) - यहाँ 'सीता' स्त्रीलिंग (ସ୍ତ୍ରୀଲିଙ୍ଗ) है, इसलिए क्रिया 'पढ़ेगी' है।
- राम और श्याम पढ़ेंगे। (ରାମ ଓ ଶ୍ୟାମ ପଢ଼ିବେ।) - बहुवचन (ବହୁବଚନ) होने पर क्रिया 'पढ़ेंगे' है।
- सीता और मीता पढ़ेंगी। (ସୀତା ଓ ମୀତା ପଢ଼ିବେ।) - बहुवचन स्त्रीलिंग होने पर क्रिया 'पढ़ेंगी' है। ओड़िआ में, 'ପଢ଼ିବ' या 'ପଢ଼ିବେ' कर्त्ता के लिंग से प्रभावित नहीं होता। [[5]]
2. विभक्ति/परसर्ग में परिवर्तन: हिन्दी में पदसमूह (ଅନେକ ପଦର ଏକତ୍ର ଗୁମ୍ଫନ) बनाते समय विभक्ति (ବିଭକ୍ତି) या परसर्ग (ପରସର୍ଗ) में परिवर्तन होता है, जबकि ओड़िआ में ऐसा नहीं होता।
- उदाहरण:
-
(i) उसका घर पास में ही है। (ତା'ର ଘର ପାଖରେ ହିଁ ଅଛି।)
-
उसके घर में चार आदमी हैं। (ତା'ର ଘରେ ଚାରି ଜଣ ଲୋକ ଅଛନ୍ତି।)
-
यहाँ 'उसका' से 'उसके' में परिवर्तन हुआ है। [[5]]
-
(ii) काला घोड़ा चरता है। (କଳା ଘୋଡ଼ା ଚରେ।)
-
काले घोड़े को घास दो। (କଳା ଘୋଡ଼ାକୁ ଘାସ ଦିଅ।)
-
यहाँ 'काला' से 'काले' में परिवर्तन हुआ है। [[5]]
-
इन व्याकरणिक बारीकियों (ବ୍ୟାକରଣଗତ ସୂକ୍ଷ୍ମତା) को समझना अनुवाद के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।