अनुवाद क्या है? (What is Translation?)
ଅନୁବାଦ ହେଉଛି ଗୋଟିଏ ଭାଷାରେ ଲେଖାଯାଇଥିବା ବାକ୍ୟ ବା ବାକ୍ୟାଂଶକୁ ଅନ୍ୟ ଏକ ଭାଷାରେ ଲେଖିବା। ଏଥିପାଇଁ ଉଭୟ ଭାଷାର ସଠିକ୍ ଜ୍ଞାନ ଆବଶ୍ୟକ।
अनुवाद (ଅନୁବାଦ) एक भाषा में लिखित वाक्य या वाक्यों को दूसरी भाषा में लिखना कहलाता है। अनुवाद कार्य में अनुवादक (ଅନୁବାଦକ) को दोनों भाषाओं का सही ज्ञान होना आवश्यक है। विशेषकर, मातृभाषा ओड़िआ से राष्ट्रभाषा हिन्दी में तथा हिन्दी से ओड़िआ में अनुवाद करने के लिए इन दोनों भाषाओं को जानना अत्यंत ज़रूरी है।
अनुवाद कैसे करें? (How to Translate?)
ଅନୁବାଦ କରିବା ପାଇଁ ପ୍ରଥମେ ମୂଳ ବାକ୍ୟକୁ ଭଲ ଭାବରେ ବୁଝିବାକୁ ପଡ଼ିବ ଏବଂ ତା'ପରେ ହିନ୍ଦୀ ବାକ୍ୟ ଗଠନ ଶୈଳୀ ଅନୁସାରେ ଅନୁବାଦ କରିବାକୁ ହେବ।
अनुवाद करने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन करना चाहिए:
- मूल वाक्य को समझना (Understanding the Original Sentence): सबसे पहले मूल भाषा के वाक्य को ध्यान से पढ़ना और उसके मूल विचार (ମୂଳ ଭାବ) को ठीक से समझ लेना चाहिए। इससे यह सुनिश्चित होगा कि आप सही अर्थ का अनुवाद कर रहे हैं।
- वाक्य के विभिन्न अंगों को समझना (Understanding Different Parts of the Sentence): प्रत्येक भाषा की वाक्य-संरचना (ବାକ୍ୟ ଗଠନ) की शैली अलग-अलग होती है। इसलिए, मूल भाषा के वाक्य के विभिन्न अंगों (ଅଂଶ) जैसे कर्त्ता (କର୍ତ୍ତା), क्रिया (କ୍ରିୟା), कर्म (କର୍ମ) आदि को समझना ज़रूरी है। उनके आपसी संबंध (ପାରସ୍ପରିକ ସମ୍ବନ୍ଧ) को भी समझना आवश्यक है।
- वाक्य के मुख्य अंश (Main Parts of a Sentence): वाक्य के दो मुख्य अंश होते हैं:
- उद्देश्य अथवा कर्त्ता का अंश (Subject Part): जो कार्य करता है या जिसके बारे में बात की जा रही है।
- विधेय अथवा क्रिया का अंश (Predicate Part): कर्त्ता के अनुसार चलने वाली क्रिया और उससे संबंधित अन्य शब्द।
क्रिया का कर्त्ता के अनुसार लिंग, वचन और पुरुष में परिवर्तन (Verb Agreement with Subject's Gender, Number, and Person)
ହିନ୍ଦୀରେ କ୍ରିୟା କର୍ତ୍ତାର ଲିଙ୍ଗ, ବଚନ ଏବଂ ପୁରୁଷ ଅନୁସାରେ ପରିବର୍ତ୍ତନ ହୁଏ, କିନ୍ତୁ ଓଡ଼ିଆରେ କ୍ରିୟା ଉପରେ କର୍ତ୍ତାର ଲିଙ୍ଗର ପ୍ରଭାବ ପଡ଼େ ନାହିଁ।
यह हिन्दी भाषा की एक महत्वपूर्ण विशेषता है। हिन्दी में क्रिया (କ୍ରିୟା) कर्त्ता (କର୍ତ୍ତା) के लिंग (ଲିଙ୍ଗ), वचन (ବଚନ) और पुरुष (ପୁରୁଷ) के अनुरूप होती है। इसके विपरीत, ओड़िआ में क्रिया पर कर्त्ता के लिंग का प्रभाव नहीं पड़ता। इसलिए, हिन्दी में हर संज्ञापद (ବିଶେଷ୍ୟ ପଦ) का लिंग जानना बहुत ज़रूरी है।
उदाहरण:
- राम पढ़ेगा। (ପୁଲିଙ୍ଗ, ଏକବଚନ)
- सीता पढ़ेगी। (ସ୍ତ୍ରୀଲିଙ୍ଗ, ଏକବଚନ)
- राम और श्याम पढ़ेंगे। (ପୁଲିଙ୍ଗ, ବହୁବଚନ)
- सीता और मीता पढ़ेंगी। (ସ୍ତ୍ରୀଲିଙ୍ଗ, ବହୁବଚନ)
विभक्ति / परसर्ग में परिवर्तन (Changes in Postpositions/Inflections)
ହିନ୍ଦୀରେ ପଦସମୂହ (ଶବ୍ଦ ଗୋଷ୍ଠୀ) ଗଠନ କରିବା ସମୟରେ ବିଭକ୍ତି ବା ପରସର୍ଗରେ ପରିବର୍ତ୍ତନ ହୁଏ, ଯାହା ଓଡ଼ିଆରେ ଦେଖାଯାଏ ନାହିଁ।
हिन्दी में पदसमूह (ଅନେକ ପଦର ଏକତ୍ର ଗୁମ୍ଫନ) बनाते समय विभक्ति (ବିଭକ୍ତି) या परसर्ग (ପରସର୍ଗ) में परिवर्तन होता है। ऐसा ओड़िआ में नहीं होता।
उदाहरण:
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मूल ओड़िआ: ତା'ର ଘର ପାଖରେ ହିଁ ଅଛି। हिन्दी अनुवाद: उसका घर पास में ही है। मूल ओड़िआ: ତା'ର ଘରେ ଚାରି ଜଣ ଲୋକ ଅଛନ୍ତି। हिन्दी अनुवाद: उसके घर में चार आदमी हैं। यहाँ 'उसका' से 'उसके' में परिवर्तन हुआ है।
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मूल ओड़िଆ: କଳା ଘୋଡ଼ା ଚରୁଛି। हिन्दी अनुवाद: काला घोड़ा चरता है। मूल ओड़ିଆ: କଳା ଘୋଡ଼ାକୁ ଘାସ ଦିଅ। हिन्दी अनुवाद: काले घोड़े को घास दो। यहाँ 'काला' से 'काले' में परिवर्तन हुआ है।
अनुवाद करने के इन अनेक तरीकों को धीरे-धीरे सीखने से अनुवाद करना आसान हो जाएगा।