कवि परिचय: मैथिली शरण गुप्त (Poet Introduction: Maithilisharan Gupt)
ଓଡ଼ିଆ: ଏହି ଭାଗରେ ଆମେ କବି ମୈଥିଳୀ ଶରଣ ଗୁପ୍ତଙ୍କ ଜୀବନୀ ଏବଂ ତାଙ୍କର କାବ୍ୟଗତ ବିଶେଷତା ବିଷୟରେ ଜାଣିବା।
मैथिली शरण गुप्त का जन्म सन् ई. में झाँसी के चिरगाँव में हुआ था [[2]]। उनके पिता, सेठ रामचरणजी, एक वैष्णव भक्त और अच्छे कवि थे, जिससे गुप्तजी को राम-भक्ति पैतृक देन के रूप में मिली [[2]]। उन्होंने बचपन से ही काव्य-रचना आरंभ कर दी थी और वे द्विवेदी-युग के एक प्रमुख कवि माने जाते हैं [[2]]।
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काव्यगत विशेषताएँ (Poetic Characteristics):
- वे गांधीवादी (ଗାନ୍ଧୀବାଦୀ) और भक्त कवि थे [[2]]।
- उनकी रचनाओं में राष्ट्रीय भावनाओं (ଜାତୀୟ ଭାବନା) की अभिव्यक्ति प्रमुखता से मिलती है [[2]]।
- उन्होंने अपनी कविताओं के माध्यम से जनता को अहिंसा (ଅହିଂସା), सत्याग्रह (ସତ୍ୟାଗ୍ରହ), राष्ट्र-प्रेम (ରାଷ୍ଟ୍ର-ପ୍ରେମ) और मानवतावाद (ମାନବତାବାଦ) का संदेश दिया [[2]]।
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सम्मान एवं उपाधियाँ (Honors and Titles):
- उन्हें 'राष्ट्रकवि' (ରାଷ୍ଟ୍ରକବି) के सम्मान से नवाजा गया [[2]]।
- आगरा विश्वविद्यालय (ଆଗ୍ରା ବିଶ୍ୱବିଦ୍ୟାଳୟ) और काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (କାଶୀ ହିନ୍ଦୁ ବିଶ୍ୱବିଦ୍ୟାଳୟ) ने उन्हें डी. लिट. की मानद उपाधि प्रदान की [[2]]।
- वे भारत के राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत राज्यसभा सांसद भी रहे [[2]]।
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प्रमुख काव्य-रचनाएँ (Major Poetic Works):
- जयद्रथ-वध, भारत-भारती, पंचवटी, साकेत, यशोधरा, जयभारत, विष्णुप्रिया आदि [[2]]।
उनका निधन सन् ई. में हुआ [[2]]।
कविता का संदर्भ एवं भाव-बोध (Poem Context and Emotional Understanding)
ଓଡ଼ିଆ: ଏହି ଅଂଶରେ ଆମେ 'ରାହୁଲ-ଜନନୀ' କବିତାର ପୃଷ୍ଠଭୂମି ଏବଂ ଏହାର ମୁଖ୍ୟ ଭାବନାକୁ ବୁଝିବା।
प्रस्तुत दो पद मैथिली शरण गुप्त के प्रसिद्ध खंडकाव्य (ଖଣ୍ଡକାବ୍ୟ) 'यशोधरा' से 'राहुल-जननी' शीर्षक के अंतर्गत लिए गए हैं [[2]]। इन पदों में कवि ने यशोधरा के माता रूप (ମାତୃ ରୂପ) और पत्नी रूप (ପତ୍ନୀ ରୂପ) का मार्मिक चित्रण किया है [[2]]।
पृष्ठभूमि (Background): नेपाल के राजकुमार गौतम (ଗୌତମ) मानव-जीवन के शाश्वत सत्य (ଶାଶ୍ୱତ ସତ୍ୟ) की खोज में क्षणभंगुर संसार (କ୍ଷଣଭଙ୍ଗୁର ସଂସାର) को त्याग देते हैं [[2]]। वे अपनी पत्नी यशोधरा (ଯଶୋଧରା) और पुत्र राहुल (ରାହୁଲ) को बिना जगाए ही रात को महल छोड़कर चले जाते हैं [[2]]।
भावनात्मक समझ (Emotional Understanding): सुबह जब यशोधरा को पति के चले जाने का पता चलता है, तो वह अत्यंत दुःखी (ଦୁଃଖୀ) होती है [[1]]। कुछ देर बाद राहुल जागता है और रोने लगता है [[1]]। यशोधरा उसे चुप कराते हुए कहती है कि यदि वह उनके जाते समय रोता, तो शायद वे उसे सोती छोड़कर न जाते [[1]]। वह अपने भाग्य में रोना लिखा मानती है और राहुल को हँसने के लिए प्रेरित करती है [[1]]। वह कहती है कि जीवन में आने वाले हर सुख-दुःख को सहना पड़ेगा और सुख के दिन अवश्य लौटेंगे [[1]]।
यशोधरा राहुल को अपना दूध (କ୍ଷୀର) और सारा स्नेह-ममता (ସ୍ନେହ-ମମତା) देकर पालने का संकल्प लेती है, जबकि अपने पति के लिए आँसू (ନୟନ-ନୀର) बहाने की बात कहती है [[1]]। वह पतिव्रता नारी (ପତିବ୍ରତା ନାରୀ) के रूप में पति की तरह सारे सुख-भोग (ସୁଖ-ଭୋଗ) त्याग देती है [[1]]।
वह अपने अतीत (ଅତୀତ) और वर्तमान (ବର୍ତ୍ତମାନ) की तुलना करती है, जहाँ कल की रानी आज दासी से भी अधिक पराधीन (ପରାଧୀନ) महसूस करती है [[1]], जैसा कि पद में कहा गया है: "चेरी भी वह आज कहाँ, कल थी जो रानी; दानी प्रभु ने दिया उसे क्यों मन यह मानी?" [[3]] यह भारतीय नारी-जीवन की सच्चाई को दर्शाता है, जहाँ आँसू भरकर भी दूसरों के लिए कर्तव्य (କର୍ତ୍ତବ୍ୟ) का संपादन करना पड़ता है [[1]]। अंत में, वह राहुल को अपना शिशु-संसार (ଶିଶୁ-ସଂସାର) मानकर दूध पीने और परिपुष्ट (ପରିପୁଷ୍ଟ) होने को कहती है, और अपने पति को अपने आँसुओं का पात्र (ପାତ୍ର) स्वीकार करने का संदेश देती है [[1]]।
प्रमुख शब्दार्थ (Key Vocabulary)
ଓଡ଼ିଆ: ଏହି ଭାଗରେ କବିତାର କିଛି ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ଶବ୍ଦ ଏବଂ ସେମାନଙ୍କର ଅର୍ଥ ଦିଆଯାଇଛି।
- अभागे (ଅଭାଗା) - भाग्यहीन (ଭାଗ୍ୟହୀନ) [[3]]
- मल धोने (ମଳ ଧୋଇବା) - दुःख मिटाने (ଦୁଃଖ ଦୂର କରିବା) [[3]]
- क्षीर (କ୍ଷୀର) - दूध (ଦୁଗ୍ଧ) [[3]]
- नयन-नीर (ନୟନ-ନୀର) - आँसू (ଲୁହ) [[3]]
- चेरी (ଚେରୀ) - नौकरानी, दासी (ଦାସୀ) [[3]]
- अबला (ଅବଳା) - कमज़ोर या दुर्बल स्त्री (ଦୁର୍ବଳ ନାରୀ) [[3]]
- परिपुष्ट (ପରିପୁଷ୍ଟ) - हृष्टपुष्ठ (ହୃଷ୍ଟପୁଷ୍ଟ) [[3]]
- रुष्ट (ରୁଷ୍ଟ) - नाराज, कुपित (ଅସନ୍ତୁଷ୍ଟ) [[3]]
- तुष्ट (ତୁଷ୍ଟ) - खुश, संतुष्ट (ସନ୍ତୁଷ୍ଟ) [[3]]