पाठ: राहुल की माँ - प्रश्न और अभ्यास
ଏହି ପାଠରେ ଆମେ 'ରାହୁଲଙ୍କ ମା' କବିତାର ପ୍ରଶ୍ନ ଏବଂ ଅଭ୍ୟାସ ବିଷୟରେ ଆଲୋଚନା କରିବା। ଏହା ଆପଣଙ୍କୁ କବିତାକୁ ଭଲ ଭାବରେ ବୁଝିବାରେ ସାହାଯ୍ୟ କରିବ।
परिचय (Introduction)
'राहुल की माँ' कविता मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित 'यशोधरा' महाकाव्य का एक अंश है। इसमें यशोधरा (ରାହୁଲଙ୍କ ମା) अपने पति सिद्धार्थ (जो बाद में बुद्ध बने) के गृहत्याग के बाद की मनोदशा का वर्णन करती हैं। वह अपने पुत्र राहुल (ପୁଅ ରାହୁଲ) के प्रति अपने कर्तव्य और अपनी पीड़ा को व्यक्त करती हैं। यह अंश विशेष रूप से एक 'अबला' (ଦୁର୍ବଳ ନାରୀ) के जीवन की वेदना को दर्शाता है।
कविता का अंश (Poem Excerpt)
ଏଠାରେ କବିତାର କିଛି ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ଅଂଶ ଦିଆଯାଇଛି ଯାହା ଆମର ପ୍ରଶ୍ନଗୁଡ଼ିକର ଉତ୍ତର ଦେବାରେ ସାହାଯ୍ୟ କରିବ।
(2) चेरी भी वह आज कहाँ, कल थी जो रानी; दानी प्रभु ने दिया उसे क्यों मन यह मानी ? अबला-जीवन, हाय ! तुम्हारी यही कहानी- आँचल में है दूध और आँखों में पानी ! मेरा शिशु-संसार वह दूध पिये, परिपुष्ठ हो । पानी के ही पात्र तुम प्रभो, रुष्ट या तुष्ठ हो |
शब्दार्थ (Vocabulary)
ଏହି ବିଭାଗରେ, ଆମେ କବିତାରେ ବ୍ୟବହୃତ କିଛି କଠିନ ଶବ୍ଦର ଅର୍ଥ ବୁଝିବା। ଏହା ଆପଣଙ୍କୁ କବିତାକୁ ସହଜରେ ବୁଝିବାରେ ସାହାଯ୍ୟ କରିବ।
- अभागे (ଅଭାଗା): भाग्यहीन (ଭାଗ୍ୟହୀନ), जिसका भाग्य अच्छा न हो।
- मल धोने (ଦୁଃଖ ଦୂର କରିବା): दुःख मिटाने (ଦୁଃଖ ଦୂର କରିବା), कष्ट दूर करना।
- क्षीर (କ୍ଷୀର): दूध (କ୍ଷୀର), दुग्ध।
- नयन-नीर (ଆଖିର ଲୁହ): आँसू (ଦୁଃଖ) (ଦୁଃଖର ଲୁହ), आँखों से निकलने वाला जल, जो दुःख या वेदना के कारण आता है।
- पक्षपातिनी (ପକ୍ଷପାତୀ): किसी एक का समर्थन करनेवाली (ଗୋଟିଏ ପକ୍ଷକୁ ସମର୍ଥନ କରୁଥିବା), जो निष्पक्ष न हो।
- रस-सुख (ଆରାମ): आराम (ଆରାମ), आनंद।
- चेरी (ଦାସୀ): नौकरानी, दासी (ଚାକରାଣୀ, ଦାସୀ), सेविका।
- अबला (ଦୁର୍ବଳ ନାରୀ): कमज़ोर या दुर्बल स्त्री (ଦୁର୍ବଳ ନାରୀ), असहाय महिला।
- परिपुष्ट (ପରିପୁଷ୍ଟ): हृष्टपुष्ठ (ସୁସ୍ଥ ଓ ପୁଷ୍ଟ), अच्छी तरह से पोषित।
- रुष्ट (ରୁଷ୍ଟ): नाराज, कुषित (ଅସନ୍ତୁଷ୍ଟ, କ୍ରୋଧିତ), क्रोधित।
- तुष्ट (ତୁଷ୍ଟ): खुश, सन्तुष्ट (ଖୁସି, ସନ୍ତୁଷ୍ଟ), प्रसन्न।
प्रश्न और अभ्यास (Questions and Exercises)
ଏହି ବିଭାଗରେ, ଆମେ କବିତାର ମୁଖ୍ୟ ପ୍ରଶ୍ନଗୁଡ଼ିକର ଉତ୍ତର କିପରି ଦେବା ତାହା ଶିଖିବା। ପ୍ରତ୍ୟେକ ପ୍ରଶ୍ନର ଉତ୍ତର ଦେବା ପାଇଁ ପଦକ୍ଷେପଗୁଡ଼ିକୁ ଅନୁସରଣ କରନ୍ତୁ।
1. प्रश्न (क): राहुल को चुप कराने के लिए यशोधरा क्या कहती है ? (ରାହୁଲଙ୍କୁ ଚୁପ୍ କରାଇବା ପାଇଁ ଯଶୋଧରା କ’ଣ କହୁଛନ୍ତି?)
- विश्लेषण (ବିଶ୍ଳେଷଣ): इस प्रश्न का उत्तर कविता की उन पंक्तियों में निहित है जहाँ यशोधरा अपने पुत्र के प्रति अपनी भावनाएँ व्यक्त करती है। वह अपने 'शिशु-संसार' (ଶିଶୁ-ସଂସାର) यानी राहुल को दूध पिलाकर परिपुष्ट (ପରିପୁଷ୍ଟ) करने की बात कहती है।
- उत्तर (ଉତ୍ତର): राहुल को चुप कराने के लिए यशोधरा कहती है कि उसका शिशु-संसार (राहुल) उसका दूध पिए और हृष्टपुष्ठ (ପରିପୁଷ୍ଟ) हो। वह अपने पुत्र को यह आश्वासन देती है कि वह उसे पूरा स्नेह और पोषण देगी, भले ही उसके पति ने उसे छोड़ दिया हो। वह अपने दुःख को भूलकर पुत्र के पालन-पोषण में ही अपना जीवन समर्पित करना चाहती है।
2. प्रश्न (ख): अबला जीवन की कहानी कैसी है ? (ଦୁର୍ବଳ ନାରୀର ଜୀବନ କାହାଣୀ କିପରି?)
- विश्लेषण (ବିଶ୍ଳେଷଣ): इस प्रश्न का उत्तर कविता की प्रसिद्ध पंक्ति "अबला-जीवन, हाय ! तुम्हारी यही कहानी- आँचल में है दूध और आँखों में पानी !" में स्पष्ट रूप से दिया गया है। यह पंक्ति अबला स्त्री के जीवन की दोहरी वास्तविकता को दर्शाती है।
- उत्तर (ଉତ୍ତର): कविता के अनुसार, अबला (ଦୁର୍ବଳ ନାରୀ) जीवन की कहानी बड़ी ही मार्मिक और दुःखद है। उसके आँचल में अपने बच्चों के लिए दूध (ମମତା ଓ ପୋଷଣ) होता है, जो उसके मातृत्व और स्नेह का प्रतीक है, लेकिन उसकी आँखों में हमेशा पानी (ଲୁହ) यानी आँसू होते हैं। ये आँसू उसके जीवन के कष्टों, वेदनाओं, त्याग और असहायता को दर्शाते हैं। इसका अर्थ है कि एक अबला स्त्री अपने बच्चों का पालन-पोषण तो करती है, पर उसका अपना जीवन दुखों और आँसुओं से भरा रहता है।